सोलर लगाने के तरीके
छत और पूंजी वाले उपभोक्ताओं के लिए:
पूंजीगत व्यय मॉडल
जिन उपभोक्ताओं के पास छत की सुविधा है और जो आरटीएस प्रणाली खरीदने का सामर्थ्य रखते हैं, वे सीधे सौर विक्रेता से सिस्टम खरीद सकते हैं। इसे पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) मॉडल कहा जाता है। आरटीएस प्रणाली का स्वामित्व ग्राहकों के पास होता है तथा वे अतिरिक्त ऊर्जा विद्युत ग्रिड को बेच सकते हैं।
सीमित छत वाले उपभोक्ताओं हेतु :
सामुदायिक सौर मॉडल :
- जिन उपभोक्ताओं के पास उपयुक्त छत की जगह नहीं है - जैसे कि किराएदार या अपार्टमेंट में रहने वाले या छोटे या छायादार छतों वाले उपभोक्ता - वे सामुदायिक सौर मॉडल के अंतर्गत किसी तीसरे पक्ष के स्वामित्व वाले सौर पीवी प्रणाली का एक हिस्सा खरीद सकते हैं। ऐसे कई उपभोक्ता एक साथ मिलकर किसी सहभागी उपभोक्ता की छत पर सामूहिक स्वामित्व वाला सौर संयंत्र स्थापित कर सकते हैं।
- संयंत्र द्वारा उत्पादित और ग्रिड को निर्यात की गई बिजली प्रत्येक सहभागी उपभोक्ता के स्वामित्व हिस्से के आधार पर उनके बिजली बिलों में आनुपातिक रूप से जमा की जाएगी।
- डिस्कॉम डीईआरसी द्वारा यथा अनुमोदित वर्चुअल नेट मीटरिंग (वीएनएम) के माध्यम से इसे सुगम बनाएंगी।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार एक ऐसा प्लेटफॉर्म लॉन्च करेगा, जहाँ छत तक पहुँच न रखने वाले उपभोक्ता अन्य उपभोक्ता को ढूंढ सकेंगे, जिनके पास छत तक पहुँच है और जो अपनी छतों पर रूफटॉप सोलर प्रणाली लगवाने को तैयार हैं।

समूह नेट मीटरिंग:
- एक से अधिक इमारतों और बिजली कनेक्शन वाले उपभोक्ता, जिनकी किसी संपत्ति में छत की जगह सीमित है या बिजली सर्विस कनेक्शन सीमित है, वे किसी अन्य संपत्ति (एक या अधिक) पर उत्पन्न अतिरिक्त सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते ये कनेक्शन एक ही डिस्कॉम क्षेत्र में हों।
- डिस्कॉम, डीईआरसी द्वारा यथा अनुमोदित समूह नेट मीटरिंग (जीएनएम) व्यवस्था के माध्यम से इसे सुगम बनाएंगे।
पीयर-टू-पीयर ट्रेडिंग:
- जिन उपभोक्ताओं के पास अपने रूफटॉप सौर संयंत्र नहीं हैं, उनके पास भी दूसरे उपभोक्ता के रूफटॉप सौर संयंत्र से उत्पन्न हुई अतिरिक्त बिजली खरीदने का विकल्प होगा, यदि वे इसे बेचना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार द्वारा संचालित पीयर-टू-पीयर (पी2पी) ऊर्जा ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऐसा किया जा सकता है।
- यह प्लेटफॉर्म एक ही डिस्कॉम क्षेत्र के उपभोक्ताओं (क्रेताओं और विक्रेताओं) को एक-दूसरे को खोजने और सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का व्यापार करने में सक्षम बनाएगा।
- डीईआरसी द्वारा विनियमन शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।

पूंजीगत बाधाओं वाले उपभोक्ताओं के लिए
नवीकरणीय ऊर्जा सेवा कंपनी (रेस्को) मॉडल:
- एक नवीकरणीय ऊर्जा सेवा कंपनी (रेस्को) उपभोक्ता की छत पर स्थापित रूफटॉप सोलर प्रणाली का विकास और स्वामित्व करती है। रेस्को आवश्यकतानुसार संयंत्र के रखरखाव के लिए अपेक्षित सभी परिचालन व्यय भी वहन करती है। ग्राहक आरटीएस प्रणाली से उत्पन्न बिजली के लिए पीपीए शर्तों के अनुसार रेस्को को भुगतान करता है और अपने बिजली बिल पर नेट मीटरिंग लाभ प्राप्त करता है।

हाइब्रिड रेस्को:
- इस व्यवस्था के अन्तर्गत उपभोक्ता, डिस्कॉम और रेस्को डेवलपर के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता किया जाता है, जिसके अन्तर्गत उपभोक्ता को अपनी छत पर स्थापित रूफटॉप सौर प्रणाली द्वारा उत्पन्न और रेस्को डेवलपर द्वारा डिस्कॉम को बेची गई बिजली के लिए नेट मीटरिंग लाभ प्राप्त होता है। डिस्कॉम उपभोक्ता को पीपीए में तय दर पर उपभोग की गई सौर ऊर्जा के लिए बिल भेजता है और ग्रिड से आयातित बिजली के लिए एक एकीकृत बिल के हिस्से के रूप में भुगतान किया जाता है। डिस्कॉम बदले में पीपीए की शर्तों के अनुसार रेस्को डेवलपर को भुगतान करता है।
- डीईआरसी द्वारा विनियमन शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।

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